Koharapeer bareilly

Chitragupt Chowk Bareilly – कोहाड़ापीर तिराहा अब चित्रगुप्त चौक के नाम से जाना जाएगा। मेयर उमेश गौतम, शहर विधायक अरुण कुमार और स्थानीय पार्षद शालिनी जौहरी ने इसका लोकार्पण किया।

इस मौके पर मेयर ने कहा कि पार्षद शालिनी जौहरी की पहल से ही यह संभव हो सका है। सौंदर्यीकरण के दौरान ही उन्हाेंने मांग रखी थी कि चौक के आगे एक फाउंटेन का निर्माण भी कराया जाएगा। उसे मंजूर कर काम शुरू करा दिया गया है। अगले कुछ दिनों में फव्वारा भी तैयार हो जाएगा। शालिनी जौहरी ने कहा कि इसके लिए सभी कई दिनों से प्रयासरत थे। उन्हें खुशी है कि अब इस तिराहे को चित्रगुप्त चौक के नाम से जाना जाएगा।

Kohrapeer Tiraha of Bareilly Now Chitragupt Choraha
Chitragupt Chowk Bareilly

चित्रगुप्त पूजा का महत्व

भगवान चित्रगुप्त को देवलोक धर्म अधिकारी भी कहा गया है. इसके साथ ही इनका संबंध लेखन कार्य से भी है. इसी कारण इस दिन कलम और दवात की भी पूजा की जाती है. भगवान चित्रगुप्त का वर्णन पद्य पुराण, स्कन्द पुराण, ब्रह्मपुराण, यमसंहिता व याज्ञवलक्य स्मृति सहित कई ग्रंथों में मिलता है.  पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की काया से हुई है. वहीं एक अन्य कथा के अनुसार इनकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से भी बताई जाती है. माना जाता है समुद्र मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए थे.  जिसमें इनकी उत्पत्ति लक्ष्मी जी साथ हुई. श्रीचित्रगुप्त जी ने ज्वालामुखी देवी, चण्डी देवी और महिषासुर मर्दिनी की पूजा और और साधना की थी.

चित्रगुप्त भगवान को यमराज का सहयोगी माना जाता है. वे सभी प्राणियों के अच्छे-बुरे का लेखा जोखा रखते हैं. हर साल वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को चित्रगुप्त जयंती के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन उनकी उत्पत्ति हुई थी.

चित्रगुप्त महाराज कायस्थ लोगों के इष्ट देव माने जाते हैं, इसलिए उनकी जयंती को खासतौर पर कायस्थ समाज में ज्यादा प्रचलित है. भुजाओं में कलम, दवात, करवाल और किताब धारण करने वाले चित्रगुप्त जी को यमराज का मुंशी भी कहा जाता है. व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए यह दिन नए साल की शुरुआत जैसा है. इस दिन नए बहीखातों पर ‘श्री’ लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है.

ये है कथा

सृष्टि के निर्माण के उद्देश्य से जब भगवान विष्णु ने अपनी योग माया से सृष्टि की कल्पना की तो उनकी नाभि से एक कमल निकला, जिस पर एक पुरूष आसीन थे. उनको ब्रह्मांड की रचना का दायित्व सौंपा गया. ब्रह्मांड की रचना और सृष्टि के निर्माण की वजह से उन्हें ब्रह्मा कहा गया. भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण करते समय स्त्री-पुरुष, पशु-पक्षी, देव-असुर, गंधर्व और अप्साराएं बनाईं.

इसी क्रम में यमराज का भी जन्म हुआ. यमराज को पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यों को कर्मों के अनुसार सजा देने का कार्य सौंपा गया था. यमराज ने इसके लिए ब्रह्मा जी से एक सहयोगी की मांग की. इसके बाद ब्रह्मा जी ने एक हजार वर्ष तक तपस्या की. इसके बाद एक पुरुष की उत्पत्ति हुई जिन्हें चित्रगुप्त कहा गया. ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ कहा गया.

पूजन से मिलती नर्क के कष्ट से मुक्ति

चित्रगुप्त जयंती के अलावा भगवान चित्रगुप्त की पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भी की जाती है. पूजा के लिए एक चौकी पर भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर को रखें. इसके बाद श्रद्धापूर्वक उन्हें अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, पुष्प, दक्षिणा, धूप-दीप और मिष्ठान अर्पित करें. इसके बाद उनसे जाने अनजाने हुए अपराधों के लिए क्षमा मांगे. मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. इससे व्यक्ति को मृत्यु के बाद नर्क के कष्ट नहीं भोगने पड़ते.

English Version

Chitragupt chowk will become Kohadapeer Tiraha

Kohadapir Tiraha will now be known as Chitragupta Chowk. Mayor Umesh Gautam, city MLA Arun Kumar and local councillor Shalini Johri inaugurated it at 4 pm on Wednesday.On this occasion, the Mayor said that this has been possible only due to the initiative of Councillor Shalini Johri. During the beautification itself, he had demanded that a fountain would also be constructed in front of the square. It has been approved and the work has been started. The fountain will also be ready in the next few days. Shalini Johri said that everyone was trying for this for many days. He is happy that now this intersection will be known as Chitragupta Chowk.

Importance of Chitragupta Puja

Lord Chitragupta has also been called Devlok Dharma Adhikari. Along with this, they are also related to writing work. For this reason, pen and medicine are also worshiped on this day. The description of Lord Chitragupta is found in many texts including Padya Purana, Skanda Purana, Brahma Purana, Yamasamhita and Yagyavalakya Smriti. According to mythology, Shri Chitragupta ji originated from the body of the creator Brahma ji. At the same time, according to another story, their origin is also told from the churning of the ocean. It is believed that 14 gems were obtained from the churning of the ocean. In which he originated with Lakshmi ji.

Lord Chitragupta is considered an ally of Yamraj. He keeps an account of the good and bad of all beings. Chitragupta Jayanti is celebrated every year on the seventh day of Shukla Paksha of Vaishakh month. It is believed that he was born on this day.

Chitragupta Maharaj is considered to be the presiding deity of the Kayastha people, so his birth anniversary is especially popular in the Kayastha society. Chitragupta ji, who holds a pen, dawat, karwal and a book in his arms, is also called the scribe of Yamraj. For the people of the business class, this day is like the beginning of the new year. On this day work is started by writing ‘Shri’ on new books.

This is the Story

For the purpose of creation of the universe, when Lord Vishnu conceived the creation with his Yoga Maya, a lotus emerged from his navel, on which a man was seated. He was entrusted with the responsibility of creating the universe. He was called Brahma because of the creation of the universe and the creation of the universe. While creating the universe, Lord Brahma created men and women, animals and birds, gods and demons, Gandharvas and Apsaras.

Yamraj was also born in this sequence. Yamraj was entrusted with the task of punishing the people living on the earth according to their deeds. Yamraj asked for an ally from Brahma ji for this. After this Brahma ji did penance for a thousand years. After this a man was born who was called Chitragupta. Lord Chitragupta was called Kayastha because of being born from the body of Brahma ji.

Worship gives freedom from the pain of hell

Apart from Chitragupta Jayanti, Lord Chitragupta is also worshiped on the second day of Shukla Paksha of Kartik month. Place the picture of Lord Chitragupta on a post for worship. After this, offer them akshat, kumkum, vermilion, flowers, dakshina, incense-lamp and sweets with reverence. After this, ask for forgiveness from him for the crimes he has committed unknowingly. It is believed that by doing this, God is pleased and blesses. Due to this, the person does not have to suffer the sufferings of hell after death.

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